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बिहार में सूदखोरी : 2 बोरी अनाज का 25 साल में सूद साढ़े 4 लाख रुपया , ऐसा नही सुना होगा कभी

पटना । बिहार में सूदखोरी का एक अजीबोगरीब मामला सामना आया है. दरअसल कहानी जमुई की है जहां एक सूदखोर ने किसान के एक बोरी चावल और एक बोरी गेहूं के बदले साढ़े चार लाख रूपये मांगे हैं. पच्चीस साल पहले गरीबी की हालात मे अपने बच्चों को पालने के लिए जमुई जिले के सूदूर गांव के एक शख्स रामधनी दास ने गांव के ही रंजीत दास से एक मन चावल और गेहूं उधार लिया था. उधार लिये गए अनाज के बदले सूद पर सूद जोड़कर रामधनी से 27 हजार रुपया 15 साल पहले मांगा गया. रामधनी 27 हजार देने मे लाचार था तब उसके तीन कठ्ठे जमीन पर अनाज देने वालों ने कब्जा कर लिया. फिर अब पच्चीस साल के बाद सूद पर सूद जोड़ कर अनाज के बदले साढे चार लाख से अधिक रकम की मांग हो रही है. इतनी बड़ी रकम भला मजदूर परिवार कैसे दे तो पंचायत ने एक तरफा फैसला करते हुए रामधनी को अपनी जमीन भूल जाने और उसकी रजिस्ट्री अनाज देने वाले को करने का फरमान जारी किया. कई साल पहले मात्र कुछ बोरे अनाज के बदले सूद के साथ लाखो रुपये की मांग से परिवार परेशान है। हैरानी की बात है कि अनाज के बदले गरीब के जमीन पर सूदखोर कई वर्षों से कब्जा भी कर रखे है. जमुई जिले के सिकंदरा थाना क्षेत्र के मथुरापुर पंचायत के माधोपुर के इस गरीब परिवार के सामने मुसीबत आ पड़ी है. पच्चीस साल पहले जिस मुसीबत से बचने के लिए इस परिवार के मुखिया रामधनी दास ने कुछ बोरे अनाज अपने गांव के चंदर दास से उधार लिया था. तब 25 साल पहले मुसीबत थी कि पत्नी की मौत के बाद गरीबी के हालात में उन्हें अपने तीन बेटे और दो बेटियों को पालना था. उस समय रामधनी के पास कुछ भी नहीं था. भूखे बच्चों को पालने के लिए उसने गांव के चंदर दास से एक मन चावल और एक मन गेंहू लिया था. लेकिन चावल और गेंहूं के वो दो बोरे समस्या बन गई है. पंचायत ने फैसला सुना दिया है कि 25 हजार रुपया लेकर रामधनी अपनी जमीन चंदर दास से पुत्र के नाम से लिख दे हालांकि रामधनी के तीन कठ्ठे की जमीन पर उधार देने वाले चंदर दास के परिवार का ही कब्जा बीते कई वर्षो से है. मात्र दो बोरे अनाज के बदले सूद पर सूद जोड़कर अब रामधनी और उसके परिवार लगभग चार लाख अस्सी हजार रुपये की मांग हो रही है. चुकि रामधनी और उसके बेटे गरीब हैं. दूसरे प्रदेशों मे मजदूरी कर परिवार चलाते हैं वो इतनी बडी रकम कहां से देंगे. पच्चीस साल पहले अनाज देने वाले परिवार ने जमीन की ही मांग कर उसे अपने नाम लिखवाने के लिए दबाव दे रहे हैं. यह परिवार जब 27 हजार रुपये नहीं लौटा सका तभी से माधोपुर गांव के एक मिट्टी वाले मकान और तीन कठ्ठा जमीन पर चंदर दास के परिवार वालों ने कब्जा कर रखा है. रामधनी दास और उसका पूरा परिवार परेशान है कि वो क्या करे. उसकी जमीन पर से कब्जा कैसे हटे. पच्चीस साल पहले ली गई अनाज के दो बोरे की कीमत लाखो रुपये मे कैसे चुकाए. सूद पर सूद के हिसाब मे जकड़े परिवार न्याय के लिए गुहार लगाया है. पंचायत में बैठने वाले मथुरापुर पंचायत के सरपंच भी कहते हैं कि उधार के रुप में अनाज लिया गया था लेकिन शायद पैसे भी जिसकी कीमत अब लाखों रुपये में हो चुकी है जिसे लेकर पंच ने जमीन लिख देने का फैसला सुनाया है. दो मन अनाज उधार लेने के कारण सिकंदरा थाना इलाके के माधोपुर गांव के रामधनी दास की जमीन पर अनाज उधार देने वाले परिवार का कब्जा है. 25 साल बाद अनाज के बदले सूद के रुप मे लाखो रुपये की मांग, नहीं तो जमीन लिख देने के फैसले ने फिलहाल एक परिवार की मुश्किलें बढ़ा दी है. इस मामले में जब जिले के डीएम को जानकारी दी गई तो उनका कहना है कि बात चाहे अनाज की हो फिर पैसे की सूद का काम गैर कानूनी है. इस मामले में जो भी लोग दोषी होगें कार्रवाई की जाएगी.

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