Breaking
सासाराम में बंद मकान में लाखों की चोरी , घर बंद कर गृह स्वामी गए थे विवाह समारोह मेंपानी की समस्या को लेकर जिलाधिकारी योगेन्द्र सिंह ने पी एच ई डी विभाग का किया औचक निरीक्षण अनुपस्थिति कर्मी का वेतन पर रोकरोटरी लीडरशिप इंस्टिट्यूट का दो दिवसीय कार्य शाला का उद्घाटनजिला निर्वाचन पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त रूप से की मीडिया ब्रीफिंगपूर्वी चंपारण के हराज गांव के युवक की शिवहर के कुशहर दुर्गा मंदिर में हो गई है मृत्युPurva Express Derail: बिहार के यात्रियों ने बताया-दो भागों में बंट गई ट्रेन, भयावह था मंहावड़ा दिल्ली पूर्वा एक्सप्रेस का 12 डिब्बे पटरी से उतरे, बीस घायलअपराधियों ने जदयू प्रदेश सचिव के भाई के घर चार लाख की डकैती , नालंदा पुलिस जाँच में जुटीपतेज प्रताप यादव ने रीगा में सतु घोलते हुए कहा सतु की तरह बीजेपी और जदयू को घोल कर पी जायेंगेशिवहर के पुरनहिया में तेज प्रताप यादव ने कहा , शिवहर का राजद प्रत्याशी भाजपा का एजेंट है , लालू राबड़ी मोर्चा का सिपाही और जनता से जुड़े हैं अंगेश , जिनको जिताने के लिए शिवहर के लोगों से कर रहे हैं जनसंपर्क

आखिर क्यों हुआ था आज ही के दिन भगवान राम का जन्म , पढ़ें पूरी कहानी

http://www.Youtube.com/todaybiharnews

रिपोर्ट तारकेश्वर प्रसाद

आरा। आज पूरे देश में रामनवमी धूमधाम से मनाया जा रहा है . कहीं राम की झांकी तो कहीं राम के भजन श्लोक से भगवान राम को याद कर रहे हैं . बता दें कि भारतीय भूमि हमेशा से ही एक पवित्र भूमि रही है, इतिहास के अनुसार यहाँ कई देवी देवताओं ने अवतार लिए है. अगर हम इसी इतिहास पर ध्यान केंद्रित करें, तो जब रावण के अत्याचार बहुत बढ़ गए और लोग परेशान हो गए, तो इन अत्याचारो से मुक्ति दिलाने के लिए पुनः भारतीय भूमि पर एक महापुरुष ने जन्म लिया. इस महापुरुष का नाम भगवान राम था, जिन्होने रावण के अत्याचारों से मुक्ति दिलवाई और उस वक़्त लोगों का उद्धार किया. त्रेता युग में जन्में भगवान राम के जन्मदिवस को ही राम नवमी के रूप में मनाया जाता है.हर हिन्दू त्योहार का अपना एक अलग महत्व होता है, उसी तरह से राम नवमी का यह त्योहार धरती पर से बुरी शक्तियों के पतन और यहाँ साधारण मनुष्यों को अत्याचारों से मुक्ति दिलवाने के लिए भगवान के स्वयं आगमन का प्रतीक मानी जाती है. इस दिन धरती पर से असुरों के अत्याचारों को समाप्त करने के लिए भगवान विष्णु ने स्वयं धरती पर अवतार लिया था. राम नवमी सभी हिंदुओं के लिए एक खास उत्सव है, जिसे वह पूरे उत्साह से मनाता है. इस दिन जन्में श्री राम ने धरती पर से रावण के अत्याचार को समाप्त कर यहाँ राम राज्य की स्थापना की थी और दैवीय शक्ति के महत्व को समझाया था.इस दिन ही नवरात्रि का अंतिम दिन भी होता है, इसलिए दो प्रमुख हिन्दू त्योहारो का एक साथ होना, इस त्योहार के महत्व को और अधिक बढ़ा देता है. कहा जाता है कि श्री गोस्वामी तुलसीदास जी ने जिस राम चरित मानस की रचना की थी, उसका आरंभ भी उन्होने इसी दिन से किया था.त्रेता युग में जब धरती पर रावण और तड़का जैसे असुरो का आतंक बढ़ गया तो स्वयं भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के अवतारो का धरती पर आगमन हुआ और इन्होने अपने भक्तो का उद्धार किया. पुरानी कथाओ के अनुसार त्रेता युग में अयोध्या के राजा दशरथ की 3 पत्नियाँ थी, परंतु फिर भी वे संतान सुख से वंचित थे. महाराज दशरथ ने अपनी एक मात्र पुत्री शांता को गोद दे दिया था, जिसके बाद उन्हें कई वर्षो तक कोई संतान नहीं हुई. इससे व्यथित राजा दशरथ को ऋषि वशिष्ठ ने कमेष्ठि यज्ञ करवाने की आज्ञा दी. इस यज्ञ के फलस्वरूप राजा दशरथ के यहाँ तीनों रानियों को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई और उनकी प्रथम पत्नी कौशल्या की कोख से भगवान राम का जन्म हुआ. राजा दशरथ के तीन अन्य पुत्र भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न थे.ब्रह्म ऋषि वशिष्ठ भगवान राम के गुरु थे, जिन्होंने उन्हें वैदिक ज्ञान के साथ- साथ शस्त्र अस्त्र में निपूर्ण किया. ब्रह्म ऋषि विश्वामित्र ने भी राम को शस्त्र विद्या दी और इन्ही के मार्गदर्शन में राम ने तड़का वध एवम अहिल्या उद्धार किया और सीता स्वयम्वर में हिस्सा लिया और सीता से विवाह किया.महाराज दशरथ अपने जेष्ठ पुत्र राम को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे, लेकिन उनकी अन्य पत्नी कैकई की मंशा थी, कि उनका पुत्र भरत सिंहासन पर बैठे, इसलिए उन्होंने राजा दशरथ से अपने दो वरदान (यह वे वरदान थे, जिनका वचन राजा दशरथ ने तब दिया था, जब युद्ध के दौरान रानी कैकई ने राजा दशरथ के प्राणों की रक्षा की थी) मांगे, जिसमे उन्होंने भरत का राज्य अभिषेक और राम के लिए वनवास माँगा और इस तरह भगवान राम को चौदह वर्षो का वनवास मिला. इस वनवास में सीता एवम भाई लक्ष्मण ने भी अपने भाई के साथ जाना स्वीकार किया. साथ ही भरत ने भी भातृप्रेम को सर्वोपरि रखा और एक वनवासी की तरह ही चौदह वर्षो तक अयोध्या को एक अमानत के रूप में स्वीकार किया.

वनवास में भगवान राम ने कई असुरों का संहार किया

इस वनवास में भगवान राम ने कई असुरों का संहार किया. शायद कैकई के वचन केवल आधार थे, क्यूंकि नियति कुछ इस प्रकार थी. भगवान राम ने अपने वनवास काल में हनुमान जैसे सेवक, सुग्रीव जैसे मित्र को पाया. नियति ने सीता अपहरण को निम्मित बनाकर रावण का संहार किया. सीता जन्म का उद्देश्य ही रावण संहार था, जिसे श्री राम ने पूरा कर मनुष्य जाति का उद्धार किया।

Share this

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Show Buttons
Hide Buttons