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परोपकार ही सबसे बड़ा पुण्य हैं. दूसरों की सहायता व सम्मान करना आत्मजयी बना देता है. दूसरों के अज्ञान व अंधकार को हर लेना वहीं पुण्य हैं श्रीमदभागवत कथा प्रवाचिका पंडित पूजा द्विवेदी

पंकज मिश्रा

 

अमनौर ।परोपकार ही सबसे बड़ा पुण्य हैं. दूसरों की सहायता व सम्मान करना आत्मजयी बना देता है. दूसरों के अज्ञान व अंधकार को हर लेना वहीं पुण्य हैं जबकि दूसरो को दुख देना ह ी पाप है. उक्त बातें अमनौर स्थित एचआर काॅलेज के पास आयोजित ग्यारह दिवसीय श्री मारुति नंदन महायज्ञ के अंतिम दिन बुधवार की देर शाम उरई उत्तर प्रदेश से चल कर आयी श्रीमदभागवत कथा प्रवाचिका पंडित पूजा द्विवेदी ने अपने प्रवचन के दौरान एक प्रसंग की चर्चा करते हुए कही कि सत्संग से प्रतिकूलता में खड़े रहने की शक्ति मिलती है. सत्संग में संसय नहीं रह जाता है. आपके अंदर छीपे उच्चता, दिव्यता को उजागर कर देती है. परमात्मा से बड़ा इस संसार में कोई नहीं है. उन्हें याद करने मात्र से ही आपके कल्याण का रास्ता दिखाई देने लगता है. पंडित पूजा द्विवेदी ने श्रीमदभागवत कथा के एक प्रसंग पर अपने संबोधन में कहा कि जन्म के बाद श्री कृष्ण के गोकुल में आगमन के बाद गोकुल की धरती आनन्दित हो गए. सभी देवी देवताओं का आगमन होने लगा. सभी जगह ऐश्वर्य, सौन्दर्य, हरियाली छा गयी. सभी लोग श्री कृष्ण के आगमन पर खुशी से झूम उठे. अपने प्रवचन के क्रम में उन्होंने कहा कि परमात्मा ही आनंद का श्रोत है. सत्संग से ही अध्यात्मिक अंतरण बनेगा. इस मौके पर मुख्य रूप से पूर्व मुखिया विजय कुमार विधार्थी, आयोजन समिति के सचिव अशोक प्रसाद कुशवाहा, भाजपा नेता अमरेन्द्र नारायण ललन, शुभम सिंह, प्रियरंजन सिंह युवराज, कन्हैया लाल कुशवाहा, किशन कुशवाहा, सोनु सिंह आदि सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु भक्तो उपस्थित थे .

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