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शराब बंदी जैसा पॉलीथिन बंदी भी फेल ,जब पॉलीथिन बिकता नही तो दीखता कहा से है

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रिपोर्ट तारकेश्वर प्रसाद

आरा। शहर को पॉलिथीन मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन के अफसरान ने कई बार पॉलिथीन बंद करने के फरमान जारी किए। कई बार बाजार में महीनों तक पॉलिथीन की खरीद-फरोख्त बंद रही। लोगों के हाथों में कपड़ों के थैले दिखाई देने लगे, लेकिन आखिरकार हर बार यह अभियान फेल हो गया। वजह यह कि बाजार में तो पॉलिथीन को बंद करा दिया गया,

लेकिन शहर में चल रही उन फैक्ट्रियों को नजरअंदाज कर दिया गया जो बगैर किसी रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस के पॉलिथीन का उत्पादन कर रही हैं। बतादे कि राज्य सरकार द्वारा पॉलीथिन बंदी के बाद आरा शहर में पिछले दिनों नगर पालिका की टीम के द्वारा दो दिन छापेमारी अभियान चलाया गया था। इसके अलावा प्रचार वाहन से लोगों से पॉलीथिन प्रयोग न करने की अपील की थी। मगर शहर में इसका असर नहीं दिखाई दे रहा है। लोग खुलेआम पॉलीथिन में सामान लेकर जा रहे हैं। शहर में पॉलीथिन बंदी के बावजूद दुकानों और ठेलों पर खुलेआम लोग पॉलीथिन में सामान लेकर जा रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि ज्यादातर लोग बाजार में बिना थैले लिए खरीदारी करने आते हैं। ऐसे में उन्हें अगर पॉलीथिन में सामान न देने के लिए कहते हैं तो वे कहते हैं कि शहर में दूसरे दुकानदार तो पॉलीथिन दे रहे हैं। इस पर वे सामान छोड़कर दूसरी दुकानों पर चले जाते हैं, जहां पर उन्हें पॉलीथिन पर सामान मिलता है। इसलिए मजबूरी में पॉलीथिन रखनी पड़ रही है। कपड़े के थैले रखे थे वे पॉलीथिन के मुकाबले काफी महंगे पड़ते हैं, ग्राहक उसके पैसे देने को तैयार नहीं होता और सामान छोड़कर चला जाता है। जब तक पॉलीथिन पर पूरे शहर में सख्ती से प्रतिबंध नहीं लगेगा तब तक लोग घरों से थैले लेकर नहीं आएंगे और पॉलीथिन की मांग करते रहेंगे। इसलिए पॉलीथिन पर पूरे शहर में सख्ती से बंदी कराई जाए।

इसके अलावा लोगों को पॉलीथिन से होने वाले नुकसान के बारे में भी बताना चाहिए, जिससे वे इसके दुष्प्रभाव को जानकार खुद ही पॉलीथिन का प्रयोग करना छोड़ दें। पॉलिथीन से प्रदूषण एक गंभीर वैश्विक समस्या बन गया था।जिससे सरकार द्वारा मजबूर हो कर प्लास्टिक पर बैन लगा दिया था ।पर आरा के कई जगहों पर सड़क किनारे पॉलिथीन देखने को मिल रहा जिससे आप अनुमान लगा सकते हैं ,, जब बिकता नही तो दीखता कहा से है।

वही सरकार का बंद करने का मनसा ये था

पॉलिथीन (प्लास्टिक) दुनिया भर में अरबों प्लास्टिक के बैग हर साल फेंके जाते थे। ये प्लास्टिक बैग नालियों के प्रवाह को रोकते हैं और आगे बढ़ते हुए वे नदियों और महासागरों तक पहुंचते हैं। चूंकि प्लास्टिक स्वाभाविक रूप से विघटित नहीं होता है इसलिए यह प्रतिकूल तरीके से नदियों, महासागरों आदि के जीवन और पर्यावरण को प्रभावित करता है। प्लास्टिक प्रदूषण के कारण लाखों पशु और पक्षी वैश्विक स्तर पर मारे जाते थे। जो पर्यावरण संतुलन के मामले में एक अत्यंत चिंताजनक पहलू बना हुआ था ।

उल्लंघन करने पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 15 के तहत दंड

इस प्रावधान का उल्लंघन करने पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 15 के तहत दंड का प्रावधान भी है। इसके बाद भी यहां अभी तक इस पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। शहर के बाजारों में खुलेआम पॉलीथिन का उपयोग दुकानदार और आमलोग कर रहे हैं। वही लोगो का कहना है कि शराब बंदी के बाद पॉलीथिन बंदी भी फेल हो गया । सरकार का पॉलीथिन से हो रहे प्रदूषण रोकने का मंशा नकाम होते दिख रहा है।

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