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सात निश्चय योजना सालों से आखिर धरातल पर क्यों नहीं, आखिर कौन है गुनहगार मुखिया या वार्ड ,जाने इस विशेष रिपोर्ट में

रिपोर्ट – तारकेश्वर प्रसाद

आरा। सात निश्चय योजना आखिर धरातल पर क्यों नहीं उतर पा रही है । आखिर पंचायत के मुखिया और वार्ड आपस में क्यों लड़ रहे हैं ? आखिर क्यों नहीं मुख्यमंत्री की सात निश्चय योजना अभी तक सफल हो पाया हैं ?।बतादे कि अब मुख्यमंत्री के सात निश्चय योजना के तहत मिले अधिकार को वार्ड सदस्य किसी भी परिस्थिति में खोना नहीं चाहते हैं। भले ही इसके लिए उन्हें कोई कुर्बानी देनी पड़े। उधर, राज्य सरकार के निर्णय के खिलाफ मुखिया संघ आंदोलन तेज कर रखा है । ताकि वार्ड सदस्य को मिले अधिकार को बंद हो और सात निश्चय योजना का कार्य मुखिया द्वारा ही कराया जा सके।

इसको देखते हुए वार्ड सदस्य भी मुखिया से अब दो-दो हाथ करने के मूड में आ गए हैं।विदित हो कि राज्य सरकार ने पंचायतों में होने वाले पेयजल आपूर्ति, पक्की नाली एवं गली का कार्य को मुख्यमंत्री के सात निश्चय योजना में शामिल कर दिया है। इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी वार्ड सदस्य की अध्यक्षता में गठित वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंध समिति को दे दिया गया है। जबकि पंचायत में होने वाले सभी कार्य पंचायत के मुखिया अपने मन मुताबिक ही कराते रहे हैं। इसमें वार्ड सदस्यों की कोई भूमिका नहीं रहती थी। लेकिन राज्य सरकार ने बिहार पंचायती राज्य अधिनियम बनाकर वार्ड सदस्यों को भी विकास कार्य की जिम्मेदारी दे दी है। यह पंचायतों के मुखियों को नागवार गुजर रहा है। इसका कारण भी है कि मुखिया केवल वार्ड की योजनाओं को स्वीकृति प्रदान करेंगे और योजना के लिए जो राशि पंचायत में आएगी उसे वार्ड सदस्य के अध्यक्षता में गठित वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति को भेज देंगे। इससे सभी मुखिया अपने अधिकार में कटौती देख परेशान हैं। मुखियों के विरोध के चलते पंचायतों के चयनित वार्डों में मुख्यमंत्री के सात निश्चय योजना आजतक धरातल पर नहीं उतर सकी। वहीं राज्य सरकार के आदेश पर ग्रामीण विकास विभाग मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना में शामिल हर घर जल का नल, हर गली एवं नाली पक्की को धरातल पर उतारने के लिए प्रयास तेज कर दिया है।वही इस मामले में प्रदेश अध्यक्ष वार्ड सदस्य महासँध बिहार सद्दाम बादशाह ने कहा कि वार्ड सदस्य को जो अधिकार मिला वह तो अधूरा अधिकार है मेन पावर है मुखिया को मिला इसलिए हम वार्ड सदस्यों का मांग है जो बिहार सरकार प्रशासनिक स्वीकृति का अधिकार जो मुखिया को दिया है वह अधिकार मुखिया से हटाकर वार्ड सदस्य को दें तब देखिए विकास कितना तेजी से होता है बिहार में इसलिए माननीय मुख्यमंत्री जी से मेरा व्यक्तिगत मांग है की प्रशासनिक स्वीकृति का अधिकार हम वार्ड सदस्य को दें।

वही इस सरकार की कदम के खिलाफ बिहार प्रदेश मुखिया संघ पटना हाईकोर्ट में मुकदमा दायर किया था। इस मामले में पटना हाईकोर्ट ने अपना निर्णय सुनते हुए स्थिति साफ कर दिया है।वही इस मुकदमे की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सात निश्चय योजना का जिम्मा मुखियों के हाथों में देने का आदेश पारित किया है। हाईकोर्ट के आदेश पर खुशी जाहिर करते हुए मुखिया द्वारा कहा गया था कि सरकार ने साजिश के तहत पंचायती राज संस्था को कमजोर करने का प्रयास किया था, जिसे कोर्ट ने बचा लिया। आखिर अब किसके हाथों में विकास होगा? कौन करेगा गांव का विकास ? अब आने वाला समय ही बताएगा। वही विकास के लिये मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के अन्तर्गत कई कल्याणकारी योजनाएँ चलाई जा रही है ,लेकिन वार्ड क्रियान्वयन समिति एवं मुखिया के विवाद के कारण कई पंचायतों में नली-गली ,हर -घर नल-जल ,पक्की गली आदि कार्यों में काफी धीमी से कार्य किये जाने से आम नागरिकों में क्षोभ व्याप्त है.

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