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मिजिल्स रूबेला टीकाकरण आखिर क्या है..?क्या है इसके लक्षण, क्या हैं इसके उपाय आइये बताते हैं आपको…

रिपोर्ट तारकेश्वर प्रसाद

आरा। रूबेला एक संक्रमण से होने वाली बीमारी है जो जीनस रुबिवायरस के वायरस द्वारा होता है। रुबेला संक्रामक है लेकिन प्राय: हल्का वायरल संक्रमण होता है। हालांकि रुबेला को कभी-कभी “जर्मन खसरा” भी कहते हैं, रुबेला वायरस का खसरा वायरस से कोई संबंधित नहीं है।_

_दुनिया भर में, विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों में वर्ष 2012 में लगभग 100,000 रुबेला मामले सामने आए, हालांकि संभावित रूप से वास्तविक मामले इससे कहीं अधिक हैं। 2012 में सबसे अधिक मामलों वाले देश थे टिमोर-लेस्ट, मेसिडोनिया, थाइलैंड, ताजिकिस्तान, और सीरिया।_

क्या होते हैं इसके लक्षण…

_रुबेला के लक्षणों में शामिल हैं कम बुखार, मिचली और प्रमुख रूप से गुलाबी या लाल चकत्तों के निशान जो लगभग 50-80% मामलों में उत्पन्न होते हैं। चकत्ते प्राय: चेहरे पर निकलते हैं, नीचे की ओर फैलते हैं और 1-3 दिनों तक रहते हैं। वायरस के संपर्क में आने के 2-3 दिनों के बाद चकत्ते निकलते हैं। सर्वाधिक संक्रामक अवधि होती है चकत्ते निकलने के 1-5 दिनों तक।_

_रुबेला विशिष्ट रूप से विकसित हो रहे भ्रूण के लिए खतरनाक होता है। अधिक जानकारी के लिए नीचे दिया गया खंड जटिलताएं देखें।_

कैसे फैलता है यह बीमारी…

_वायरस वायुजनित श्वसन के छींटों द्वारा फैलता है। संक्रमित व्यक्ति रुबेला के चकत्तों के निकलने के एक हफ्ते पहले भी, और इसके पहली बार चकत्ते निकलने के एक हफ्ते बाद तक संक्रामक हो सकते हैं। (यह बहुत ही संक्रामक होता है जब चकत्ता पहली बार निकलता है।) CRS के साथ जन्मे बच्चे एक वर्ष से अधिक समय तक दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं।रुबेला के मामले जाड़े के अंत में या बसंत के शुरुआत में अपने चरम पर होते हैं।

इसके उपचार एवं देखभाल…

_रुबेला का कोई प्रत्यक्ष इलाज नहीं है। बुखार कम करने के प्रयास के साथ-साथ सहयोगात्मक देखभाल प्रदान किया जा सकता है।_

जटिलताएँ…

_रुबेला प्राय: बच्चों में एक गंभीर रुग्णता नहीं है, और इसके लक्षण आमतौर पर हल्के होते हैं। रुबेला की जटिलताएं बच्चों की तुलना में वयस्कों में अधिक होती हैं, और इसमें अर्थराइटिस, एंसेफेलाइटिस, और न्युराइटिस शामिल हैं।_

_रोग का प्रमुख खतरा है कन्जेनिटल रुबेला सिंड्रोम (CRS). किसी महिला को गर्भावस्था के दौरान रुबेला संक्रमण होने पर, यह संक्रमण विकसित हो रहे भ्रूण तक पहुंच सकता है। ऐसी गर्भावस्थाओं को सहज गर्भपात या अपरिपक्व जन्म का जोखिम होता है। यदिभ्रूण बच जाता है, तो बच्चे को भारी रूप से जन्म संबंधी विकृतियां हो सकती है, जिसमें बहरापन, आंखों की खराबी, हृदय संबंधी समस्याएं, मानसिक मंदन, हड्डी में जख्म और अन्य असामान्यताएं हो सकती हैं। इन विकृतियों को समग्र रूप से CRS कहते हैं। जो माताएं गर्भावस्था के पहले तीन महीने के दौरान संक्रमित होती हैं, अध्ययन के मुताबिक, उनके 50% से लेकर 90% बच्चे CRS से पीड़ित होंगे। दुनिया भर में, हर साल लगभग 100,000 बच्चे CRS के साथ जन्म लेते हैं।

रूबेला के शिकार से बचने के लिए उपलब्ध टीके…

_रुबेला का टीका एक सक्रिय दुर्बलीकृत रुबेला वायरस पर आधारित है जिसका प्रयोग 40 वर्षों से अधिक समय से किया जा रहा है। टीके की एक खुराक जीवन भर प्रतिरक्षण प्रदा कर सकती है।

राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के द्वारा चलाया गया मिजेल्स-रूबेला टीकाकरण अभियान एक वृहद अभियान है, जिसके अंतर्गत 9 महीने से लेकर 15 साल तक की आयु समूह के बच्चों को पूरे देश में मिजूल्स रूबेला का टीका लगाना है।_

सरकारी और निजी स्कूलों में चलाया जायेगा टीकाकरण…_

_मिजेल्स-रूबेला का टीका सरकारी एवं प्राइवेट स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों तथा आउटरीच साइट्स में दिए जायेंगे, जिसके तहत राज्य में 9 माह से लेकर 15 साल के बच्चों को प्रतिरक्षित किया जायेगा। इस अभियान के बाद एमआर का टीका, नियमित टीकाकरण के तहत उपलब्ध होगा और पहले दिये जाने वाले मिजेल्स टीके की दो खुराकों के स्थान पर दिया जायेगा।_

इस अभियान का लक्ष्य 100 फीसदी लक्षित बच्चों को एमआर टीका से प्रतिरक्षित कर तेजी से जनसंख्या प्रतिरक्षा का निर्माण करना तथा अतिसंवेदनशील समूह वाले बच्चों से बीमारी को दूर करना है, ताकि मिजेल्स और जन्मजात रूबेला सिंड्रोम के कारण होने वाली मृत्यु को कम किया जा सके। टीकाकरण के बाद बच्चों के शरीर में पैदा होने वाले इन लक्षणों से घबरायें नहीं मिजेल्स और रूबेला का टीका पूरी तरह से सुरक्षित है। अन्य दूसरी दवाओं और टीकों की तरह ही कुछ हल्के क्षणिक प्रतिकूल प्रभाव जैसे कि लालीपन, बुखार और शरीर में चकत्ता का होना जैसे लक्षण टीकाकरण के बाद देखने में आ सकता है, लेकिन यह सामान्य बात है। यह खुद ही ठीक हो जाते हैं या इनका उपचार बहुत ही आसानी से किया जा सकता है।

सभी से आग्रह हैं कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे इस टीकाकरण अभियान में हिस्सा लें और अपने बच्चों को स्वस्थ रखें…

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