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नहर में पानी नहीं आने से किसानों को छूट रहे हैं पसीना, बिछड़ा डालने का खत्म हो रहा है समय सीमा

 

विशेष रिपोर्ट – तारकेश्वर प्रसाद

आरा।भोजपुर जिले की नहरों में पानी नहीं छोड़ने और अधिकतर राजकीय नलकूपों में तकनीकी गड़बड़ी के चलते सिंचाई के लिए पानी का संकट पैदा हो गया है। इसके चलते किसान धान की नर्सरी डालने को लेकर चिंतित हैं। जिन किसानों ने निजी संसाधनों से नर्सरी डाल दी है, सिंचाई के अभाव में पौधे मुरझा रहे हैं। छोटे किसान मानसून आने का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि रोहिणी नक्षत्र बीत जाने के बाद भी नहरों में पानी की उपलब्धता नहीं के बराबर है। वही निजी नलकूपों के सहारे किसान महंगे डीजल खरीदकर बिचड़ा डालने को विवश हैं।

सरकारी बीज भंडार में बीज की कमी होने से किसान लगातार हलकान हो रहे है। प्रखंड कार्यालयों की लगातार खाक छानने के बाद भी किसानों को अनुदान आधारित बीज नहीं मिल रहे है। जबकि प्रखंड कार्यालयों को ही अपना घर बार मानकर कुंडली मारे बैठे बिचौलियों की चांदी कट रही है, जिनके बीच अनुदान आधारित बीजों का वितरण कर प्रशासनिक अधिकारी अपने कर्तव्यों की इति श्री मान लेते हैं। जबकि भारी संख्या में वास्तविक और जरूरतमंद किसान इन लाभों से पूरी तरह वंचित है। भोजपुर में धान का बिचड़ा लगाने हेतु अनुदान आधारित बीजों की प्रतीक्षा कर रहे अधिकांश किसानों की यही शिकायत है। इनकी यह भी शिकायत है कि किसानों के लिए बनी सरकारी योजनाओं का विधिवत प्रचार प्रसार तक नहीं किया जाता है, जिसके चलते उन्हें इन योजनाओं की जानकारी तक नही मिल पाती है जिससे किसान जनकारी की वजह से योजनाओं से वंचित हो जाते है। कई किसानों की यह भी शिकायत है कि खरीफ महोत्सव में किसानों को यह भरोसा दिलाया गया था कि उन्हें समय पर पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध करा दिया जाएगा। पर समय बीतने के बाद भी बीज नहीं मिलने से किसान थक हारकर कालाबाजारियों के शिकार बन रहे हैं।

किसानों के लिए चलाई जा रही बीज ग्राम योजना, मुख्यमंत्री तीव्र बीज विस्तार योजना सहित कई योजनाएं फिसड्डी साबित हो रही है। किसानों के ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा । जिससे किसानों में सरकार और जिला प्रशासन के विरोध में आक्रोश व्याप्त है। नहर में पानी लाने के लिए किसान आक्रोशित होकर सड़क भी कर चुके हैं जाम फिर भी नहीं सुन रही है जिला प्रशासन और सरकार की नेता किसानों का कहना है कि अब अगर नहर में पानी नहीं आता है तो हमारे बाल बच्चे भुखमरी के कगार पर आ सकते हैं और भूखे मरने लगेंगे क्योंकि हमारी पूंजी खेती ही है ।नहीं तो जिला प्रशासन और सरकार के नेता हमारी बातों को सुनें और जल्द से जल्द नहरों में पानी का उपलब्ध करवाएं।

  • नहरों में पानी नहीं आने से किसानों का भगवान का सहारा

वहीं कई किसान को तो अब सरकार और जिला प्रशासन से भरोसा ही उठ गया क्योंकि रोहिणी नक्षत्र का समय सीमा समाप्त हो गया है और आद्रा नक्षत्र काफी समय सीमा अब समाप्त होने वाला है और नहरों में पानी नाका बराबर है जिस से किसान चिंतित और सरकार और जिला प्रशासन के रवैया परेशान है और इन लोगों से ऊब कर अब भगवान पर ही भरोसा कर रहे हैं।

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